जून से शुरू होगी सहरसा से झंझारपुर होते हुए दरभंगा तक रेल सेवा, सहरसा में बिहार के पहले ऑटोमैटिक कोच वाशिंग प्लांट का उद्घटान

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Koshi rail bridge

Koshi rail bridge: जीएम ने सहरसा स्टेशन पर ऑटोमैटिक कोच वाशिंग प्लांट का किया उद्घटान, जून तक शुरू होगी सहरसा दरभंगा के बीच रेल

Koshi rail bridge : पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी ने शनिवार को समस्तीपुर मंडल के सहरसा से दरभंगा रेलखंड का ऐतिहासिक निरीक्षण किया गया । यह निरीक्षण कोसी रेल ब्रिज होते हुए वाया सुपौल-सरायगढ़-निर्मली-झंझारपुर होकर किया गया। इस दौरान सहरसा और दरभंगा के बीच स्थित छोटे-बड़े स्टेशनों, रेल पुलों, रेलवे ट्रैक, समपार फाटक, स्टेशन परिसर, प्रतीक्षालय एवं रेल काॅलोनियों आदि का गहन निरीक्षण किया गया एवं साफ सफाई का जायजा लिया गया।

महिला कर्मियों ने सहरसा से संभाली जीएम स्पेशल ट्रेन की कमान

भारतीय रेल में पहली बार आज महाप्रबंधक स्पेशल का परिचालन पूर्णतया महिला रेलकर्मियों द्वारा किया गया । आज के महाप्रबंधक स्पेशल ट्रेन के पायलट, गार्ड सहित सभी क्रू मेंबर महिला रेलकर्मी थीं। यहाँ तक कि इस स्पेशल ट्रेन के सुरक्षा की जिम्मेवारी भी महिला रेल सुरक्षा बल के कर्मियों द्वारा की गयी । महाप्रबंधक स्पेशल का संचालन महिला लोको पायलट संयुक्ता कुमारी, सहायक लोको पायलट मिनाक्षी सुंडी एवं गार्ड दीपा कुमारी द्वारा किया गया। महाप्रबंधक ने इन महिला रेलकर्मियों को सम्मानित किया।

सहरसा में ऑटोमैटिक वाशिंग प्लांट, कोच इंडिक्टर और फुट ओवर ब्रिज का उद्घाटन

पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक ललित चंद्र त्रिवेदी मुख्यालय के विभागाध्यक्षों एवं समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अशोक माहेश्वरी तथा अन्य उच्चाधिकारियों के साथ सर्वप्रथम सहरसा स्टेशन पहुंचे जहां उन्होंने प्रतीक्षालय, पीआरएस एवं यूटीएस, सर्कुलेटिंग एरिया, हेल्थ यूनिट, रनिंग रूम, क्रू लाॅबी आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के साथ ही महाप्रबंधक महोदय द्वारा सहरसा स्टेशन पर दूसरा पैदल उपरि पुल, कोच इंडिकेषन बोर्ड एवं अत्याधुनिक ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट का शुभारंभ किया गया । इस अत्याधुनिक ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट से 24 कोच युक्त रेक की सफाई मात्र 7-8 मिनट में पूरी कर ली जाएगी। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सफाई में लगनेवाले 80 प्रतिशत पानी को रिसाइकिल कर इसे दुबारा उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे कम समय में अधिक से अधिक ट्रेनों की उच्च गुणवत्तायुक्त सफाई हो सकेगी। साथ ही पानी की बचत से पर्यावरण संरक्षण में भी यह मददगार होगा।

सुपौल सरायगढ़ राघोपुर का किया निरीक्षण

महाप्रबंधक ने कहा कि पिछले एक वर्षों में इस क्षेत्र में काफी कार्य किये गये हैं । 1934 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद से बंद पड़े निर्मली-सरायगढ़ रेलखंड पर परिचालन प्रारंभ होने के बाद निर्मली और सुपौल (वाया दरभंगा-समस्तीपुर-खगड़िया- मानसी-सहरसा) के बीच की रेल मार्ग से वर्तमान दूरी 272 किमी से घटकर मात्र 44 किमी रह जाएगी । इससे यात्रियों के समय और धन दोनों की बचत होगी। यह इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा तथा लोगों के समृद्धि के द्वार खुलेंगे ।
निरीक्षण के क्रम में महाप्रबंधक महोदय द्व़ारा सहरसा और पंचगछिया के बीच लघु पुल संख्या-23 एवं समपार संख्या 41 का गहन निरीक्षण किया गया। इसके उपरांत महाप्रबंधक महोदय द्वारा गढ़बरूआरी और सुपौल के बीच समपार संख्या 45 एवं वृहत पुल संख्या 19ए का गहन निरीक्षण किया गया । सुपौल रेलवे स्टेशन पर उन्होंने प्रतीक्षालय, सर्कुलेटिंग एरिया, फैब्रिकेटेड शौचालय, प्लेटफाॅर्म एवं अन्य यात्री सुविधाओं का निरीक्षण किया । इसके उपरांत थरबिटिया और सरायगढ़ स्टेशनों के बीच स्थित कर्व संख्या 22 का एवं सरायगढ़ स्टेशन के पास स्थित प्वाइंट संख्या 56ए तथा सरायगढ़ स्टेषन का भी निरीक्षण किया गया।

15 जून से सहरसा दरभंगा के बीच ट्रेन

निरीक्षण के क्रम में महाप्रबंधक महोदय द्वारा सरायगढ़ से राघोपुर एवं राघोपुर से वापस सरायगढ़ तक स्पीड ट्रायल/निरीक्षण किया गया । साथ ही सरायगढ़ से झंझारपुर के बीच पड़ने वाले निर्मली, घोघरडीहा एवं तमुरिया स्टेशनों का भी महाप्रबंधक महोदय द्वारा निरीक्षण किया गया । इसके उपरांत महाप्रबंधक महोदय झंझारपुर स्टेशन स्टेशन जहां उनके द्वारा झंझारपुर स्टेशन के निरीक्षण के साथ ही झंझारपुर रेल परिसर का शुभारंभ किया गया। पत्रकारों से बात करते हुए झंझारपुर स्टेशन पर उन्होंने कहा की तमुरिया सरायगढ़ के बीच सीआरएस मई तक किया जाएगा और 15 जून तक सहरसा दरभंगा के बीच रेल सेवा शुरू कर दी जायेगी। निरीक्षण के अंत में महाप्रबंधक दरभंगा स्टेशन पहुंचे जहां उन्होेंने स्टेशन पर उपलब्ध यात्री सुविधा आदि का जायजा लिया।

कई रेल अधिकारी रहे मौजूद

निरीक्षण के दौरान पूर्व मध्य रेल मुख्यालय से प्रधान मुख्य इंजीनियर बृजेश कुमार, प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर रमेश चन्द्र, प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर आलोक कुमार मिश्र, प्रधान मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर राजेश कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/निर्माण/उत्तर देश रत्न गुप्ता, प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक सलिल कुमार झा, प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एस.के.शर्मा, प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी जे.के.पी.सिंह, प्रधान वित सलाहकार मधुकर सिन्हा, प्रधान मुख्य समाग्री प्रबंधक एन.पी.सिन्हा, प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त एस.मयंक, प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक डाॅ. पी.के.सरदार, वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक सुजीत कुमार मिश्रा सहित समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अशोक माहेश्वरी सहित मुख्यालय एवं समस्तीपुर मंडल के अन्य उच्चाधिकारीगण उपस्थित थेे ।

1934 के भूकंप में ध्वस्त हो गया था पुल

कोसी नदी संपूर्ण बिहार प्रदेश को ही नहीं अपितु समग्र भारत और नेपाल की प्रमुख नदियों में अन्यतम मानी जाती है। यह बराह क्षेत्र, कुसहा तथा चतरा स्थानों से होते हुए बिहार की सीमा पर सहरसा जिले के बीरपुर और भीमनगर स्थानों पर आती है। अपने प्रवाह का मार्ग परिवर्तित करने में कोसी का कोई जोड़ नहीं है। बिहार में कोसी नदी की धाराओं का विस्थापन पिछले 100 वर्षों में लगभग 150 किलोमीटर के दायरे में होता रहा है । कोसी नदी के दोनों किनारों को जोड़ने में यह एक बहुत बड़ी रुकावट थी ।
वर्तमान पुल का निर्माण निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच किया गया है. निर्मली जहां दरभंगा-सकरी-झंझारपुर मीटर गेज लाइन पर अवस्थित एक टर्मिनल स्टेशन था वहीं सरायगढ़, सहरसा और फारबिसगंज मीटर गेज रेलखंड पर अवस्थित था । सन 1887 में बंगाल नॉर्थ-वेस्ट रेलवे ने निर्मली और सरायगढ़ (भपटियाही) के बीच एक मीटर गेज रेल लाइन का निर्माण किया था। उस समय कोसी नदी का बहाव इन दोनों स्टेशनों के मध्य नहीं था । उस समय कोसी की एक सहायक नदी तिलयु्गा इन स्टेशनों के मध्य बहती थी जिसके ऊपर लगभग 250 फीट लंबा एक पुल था । कोसी नदी के पश्चिम दिशा में उत्तरोत्तर विस्थापन के क्रम में सन 1934 में यह पुल ध्वस्त हो गया एवं कोसी नदी निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच आ गई ।

निर्मली सुपौल की दूरी 272 किमी से घटकर होगी 22 किमी

कोसी की मनमानी धाराओं को नियंत्रित करने का सफल प्रयास पश्चिमी और पूर्वी तटबंध तथा बैराज निर्माण के साथ 1955 में आरंभ हुआ । पूर्वी और पश्चिमी छोर पर 120 किलोमीटर का तटबंध 1959 में पूरा कर लिया गया और 1963 में भीमनगर में बैराज का निर्माण भी पूरा कर लिया गया । इन तटबंधों तथा बैराज ने कोसी नदी के अनियंत्रित विस्थापन को संयमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसके कारण इस नदी पर पुल बनाने की परियोजना सकार रूप ले सकी । निर्मली से सुपौल तक का सफर वर्तमान में रेल मार्ग से वाया दरभंगा-समस्तीपुर -खगड़िया-मानसी- सहरसा होते हुए 272 किलोमीटर का है । इस पुल के निर्माण से यह 272 किलोमीटर की दूरी घटकर मात्र 22 किलोमीटर में सिमट जाएगी।

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