ट्रेनों में भारी भीड़ से कोरोना नही, लेकिन पैसेंजर ट्रेनों के बंद रहने से यात्रियों का हो रहा शोषण,दोहरा रवैया अपना रही रेलवे

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Special Trains

Special Trains : पटना‌ भभुआ ट्रेन में भारी भीड़, हालत सामान्य,नहीं हो रहा सामाजिक दूरी का पालन फिर भी मजबूरी में यात्रा करने को विवश। पैसेंजर ट्रेनें बंद रहने से उठानी पर रही है परेशानी। बसों का किराया हो गया है दोगुना

Special Trains : देश भर में बीते बर्ष मार्च में कोरोना के कारण देश भर की सभी मेल/एक्सप्रेस, इंटरसिटी सहित पैसेंजर ट्रेनों को बंद कर दिया गया था। दुर्गा पूजा से स्पेशल ट्रेनों का परिचालन रेलवे ने शुरू किया, देश भर के कई रूटों पर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चल रही है। बिहार में भी कई लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इसके साथ इंटरसिटी स्पेशल ट्रेनें और कुछ रूटों पर ही पैसेंजर ट्रेनें चल रही है जो की पर्याप्त नही है। ट्रेन बंद होने से जहां एक आम आदमी के रोजगार पर सीधा असर पर रहा है, बसों का किराया दोगाना लगने से लोगों की आर्थिक स्थिति हो रही है कमजोर

Special Trains : पटना भभुआ इंटरसिटी में भीड़, कहा है सामाजिक दूरी?? ट्रेनें बंद करने से कोरोना नही फैलता???


पसेंजर ट्रेनें नही चलने से मजबूरन यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पर रहा है। शनिवार को पटना भभुआ इंटरसिटी में पांव रखने तक की जगह नही, कहा है सामाजिक दूरी, आखिर क्यों है ऐसे हालात!! पटना गया रूट पर दिन के 11 बजे के बाद एक भी ट्रेन नही रहने के कारण इंटरसिटी में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। जब तक रेलवे पसेंजर ट्रेनों को बंद रखेगी, यात्रियो को ऐसी मजबूरी और भीड़ में यात्रा करना ही पड़ेगा। सोशल मीडिया पलटफॉर्म पर रेलमंत्री, रेल अधिकारियों से ट्रेनें चलाने को लेकर कई बार अपील भी गयी, लेकिन रेलवे सामान्य रूप से ट्रेनें चलाने नही जा रही। 

हालात सामान्य फिर भी ट्रेनें बंद, बसों में भर भर कर दोगुना किराया देकर सफर करने पर मजबूर

देश भर में हालात सामान्य है, सड़को भर भारी भीड़ है। सामाजिक दूरी का पालन तो दूर की बात है अब कही कुछ लोग ही मास्क पहने नजर आ रहे है। ट्रेनें बंद होने से बसों में भर भर कर लोग यात्रा करने को मजबूर है। ट्रेन बंद होने के बाद से बिहार के अलग अलग शहरों से दिल्ली, पंजाब जाने वाली बसें दिख जाएंगी। इसके अलावा भी लोकल ट्रेनों के बंद होने के बाद से मजबूरन पटना से गया, सहरसा से पुर्णिया, सहरसा से समस्तीपुर तक बसों में मजबूरन लोग यात्रा करने पर मजबूर है। इन बसों में यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा होती है खड़े होने की जगह नही होती। फिर भी आखिर ये रेलवे का ऐसा कोन सा रवैया है की लोकल/पसेंजर को बंद कर दिया गया है। और लोगों को बसों, वाहनों से यात्रा करने पर मजबूर होना पर रहा है। कोरोना काल के बाद से मध्यम वर्ग या सामान्य व्यक्ति की हालत पहले से खराब हो चुकी है। उपर से ट्रेनों के बंद होने से लोगों के रोजगार पर सीधा असर पर रहा है। बसों से मनमाना किराया देकर 3 घंटे का सफर 6 घंटे में तय करना पर रहा है। आखिर रेल मंत्रलाय ट्रेनें बंद कर लोगों की परेशानियों को कब तक बढ़ाता रहेगा। 

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