अब नेपाल सरकार का नया फरमान, नेपाल में हिंदी भाषा की बैन की तैयारी में है कम्युनिस्ट सरकार

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नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार भारत का विरोध करने का कोई मौका नही छोड़ रही। चीन की चाल पर पहले नेपाल ने
विवादित नक्शा पास कर भारत के उत्तराखंड के तीन इलाकों को जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा शामिल है नेपाल ने अपना क्षेत्र दिखाया इसके बाद नेपाल यही रही रुका। नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार के प्रधानमंत्री के पी ओली ने नेपाल के एफएम रेडियों पर भारत विरोधी गीत चलाये। इसके बाद भारत से किसी की शादी नेपाल में होती है तो सात साल के बाद नागरिकता मिलेगी। अब नेपाल हिंदी भाषा को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रहा है जिसका भारी विरोध हो रहा है।

नेपाल के प्रधानमंत्री का हो रहा विरोध

नेपाल की ओली सरकार के खिलाफ नेपाल में ही भारी विरोध हो रहा है। इसे दबाने के लिए भारत विरोधी हथकंडे अपना रहा है। चीन ने नेपाल की 33 हेक्टयर जमीन हथिया ली है और लोगों का इसपर से ध्यान हटाने के लिए नेपाल भारत के विरोध में आग उगल रहा है। नेपाल के तराई क्षेत्रो में रहने वाले मधेस हिंदी भाषी है। बिहार और यूपी से व्यापारिक और सामाजिक रिश्ता जुड़ा है मधेशियों का। तराई क्षेत्र में रहने वाले नेपाल के लोग चीन के खिलाफ है और कम्युनिस्ट सरकार के फैसलों का जमकर विरोध कर रहे है। मधेस क्षेत्र के सांसद ने ओली से पूछा कि क्या वह चीन के कहने पर हिंदी का विरोध कर रहे है। नेपाल की ओली सरकार चारों तरफ से घिर चुकी है और ध्यान भटकाने के लिए अनाप शनाप बयान दे रही है। नेपाल ने पहली बार भारतीय सीमा से सटे इलाकों में फौज की तैनाती की है।

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