बिना वाई लेग के निर्माण के कोशी महासेतु होकर नही पूरा होगा लंबी दूरी की ट्रेनों का सपना, तीन पॉइंट पर इंजन बदलने की समस्या??

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वर्ष 2012 में आसनपुर कुपहा के पास कोशी नदी पर रेल महासेतु का निर्माण हुआ यह रेल लाइन पूर्वोत्तर के राज्यो को छोटे रूट से दिल्ली से गुवाहाटी तक जोड़ेगा। 206 किमी लंबे सहरसा सुपौल फारबिसगंज सकरी निर्मली रेल परियोजना के पूरे होते ही दिल्ली से पूर्वोत्तर के लिए एक वेकल्पिक मार्ग मिलेगा। लेकिन एक तरफ जहां इस लाइन पर ट्रेनों के परिचालन के लिए सरायगढ़ से निर्मली तक तेजी से काम चल रहा है और फारबिसगंज रेलखंड पर रघोपुर से आगे ट्रैक बिछा दी गयी है। लेकिन दरभंगा फारबिसगंज के बीच ऐसे तीन पॉइंट है जहां लोकों रिवर्सल यानी कि इंजन बदलने की समस्या लंबी दूरी की ट्रेनो में बाधक है।

दरभंगा-सरायगढ़ और ललितग्राम में किया जाना है Y लेग का निर्माण

दरभंगा- सरायगढ़-ललितग्राम इन तीन स्टेशनों पर बिना Y लेग के निर्माण के लंबी दूरी की ट्रेनों का चलना संभव नही है। बिना Y लेग के निर्माण के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का सपना आज भी अधूरा है। 2012 में कोशी महासेतु के निर्माण के बाद भी 8 वर्षो में रेलवे ने इस और ध्यान नही दिया। रेलवे बोर्ड ने ललितग्राम में Y लेग के निर्माण की अब तक मंजूरी नही दी। दरभंगा में 300 करोड़ की लागत से Y लेग का निर्माण होना है जिसके लिए रेलवे बोर्ड ने 100 करोड़ की राशि 2020-21 में मंजूरी दी। सहरसा से आने वाली ट्रेनों के लिए सरायगढ़ में y लेग का निर्माण जरूरी है लेकिन रेलवे बोर्ड द्वारा मंजूरी मिलने के बाद भी राशि का आवंटन नही किया गया। बिना Y लेग के निर्माण के लंबी दूरी की ट्रेनों का सपना अधूरा ही रह जायेगा।

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