एक स्टेशन जिसे भुला दिया गया, 1934 के भूकंप और बाढ़ में कोशी में विलीन हो गया रहडिया स्टेशन!! 86 साल बाद रेलखंड को जीवित करेंगे प्रधानमंत्री

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86 साल बाद 18 सितंबर को मिथिलांचल को जोड़ने की एक कड़ी कोशी रेल महासेतु का उद्घटान होगा। इसके अलावा सहरसा सरायगढ़ राघोपुर आमान परिवर्तन, सुपौल सरायगढ़ आसनपुर कुपहा रेल लाइन प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घटान करेंगे। रेल का सपना करीब 80 दशक से सम्पूर्ण क्षेत्र के लोग देख रहे थे। किसी को उम्मीद नही थी कि फिर से कभी निर्मली और भपटियाही(सरायगढ़) के बीच रेल दौड़ेगी। इस सपने की नींव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने वर्ष 2003 में रखी थी। लेकिन बनते बनते 17 साल लग गए लेकिन आज भी जिस उदेश्य से इस रेलखंड का निर्माण किया जा रहा है वह अधूरा है। 6 जून 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने निर्मली महाविद्यालय से सड़क और रेल सेतु की नींव रखी थी, ट्रेन सेवा निर्मली तक नही पहुंच सकी। निर्मली से पांच किलोमीटर पहले आसनपुर कुपहा तक रेलसेवा शुरू की जा रही है। कोशी रेल महासेतु के बनने से सहरसा से दरभंगा, पूर्वोत्तर से दिल्ली के लिए एक वेकल्पिक मार्ग मिलेगा। सहरसा से दरभंगा रेलखंड के बीच 17 साल में सहरसा से आसनपुर कुपहा और दरभंगा से तमुरिया तक रेल पहुंच सकी। जिस स्थान से पूर्व प्रधानमंत्री ने शिलान्यास रखा था निर्मली के लोगों को आज भी ट्रेन का इंतजार है।

कोशी में विलीन हो गया रहडिया स्टेशन

निर्मली भपटियाही रेल लाइन का निर्माण सन 1887 में अंग्रेजों ने कराया था तब तब मालगाड़ी द्वारा सहरसा भपटियाही निर्मली होते हुए रेल दरभंगा तक जाती थी। उस समय सहरसा से सुपौल के रास्ते प्रतापगंज तक ट्रेन चलती थी। उससे आगे फारबिसगंज में कोशी नदी बहने के कारण रेल का विस्तार नहीं हो सका। तब निर्मली-भपटियाही के मध्य रहडिया स्टेशन था वहां तिल्युगा नदी पर 250 मीटर लंबा पुल बनाया गया था। रहडिया स्टेशन आज कोसी के गर्भ में है। तब भी तिल्युगा नदी वहीँ बहती थी जहाँ आज कोशी नदी बहती थी दरअसल 1887 में कोशी नदी फारबिसगंज के तरफ बहती थी और तब रहडिया के पास तिल्युगा नदी बहती थी। 1934 में भूकंप और भीषण बाढ़ से कोसी नदी के रातों रात खिसकने के बाद रहडिया स्टेशन की जगह बहने से स्टेशन सहित तिलयुगा नदी पर बना पुल कोशी के गर्भ में समा गया था। रहडिया स्टेशन कोशी रेल महासेतु के दक्षिण में था। बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित सहरसा के गज़ट में कोसी के पश्चिम की ओर खिसकने और इस दौरान रेलवे द्वारा कनवा घाट-अँचरा घाट लाइन बंद करने, रहड़िया स्टेशन के अस्तित्व सहित नाथपुर नामक व्यापारिक केंद्र के तबाह हो जाने की जानकारी मिलती है। सरायगढ़ आसनपुर कुपहा निर्मली रेल लाइन नए मार्ग से बनाया गया है। अब रहडिया स्टेशन या पहले के मूल स्थान का कोई अस्तित्व नही है।

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