भविष्य की पूर्वोत्तर द्वारा कोशी रेल महासेतु का 18 को प्रधनमंत्री करेंगे उद्घाटन, 86 साल बाद कोशी रेल ब्रिज के रास्ते सहरसा से दौड़ेगी रेल

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 मर कोसी नदी पर रेल महासेतु का शिलान्यास किया था। ठीक 17 साल बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 18 सितंबर को नवनिर्मित सरायगढ़-आसनपुर कुपहा(कोसी ब्रिज), सरायगढ़ राघोपुर रेलखंड का विधिवत उद्घाटन करेंगे। सहरसा से आसनपुर कुपहा तक डेमू पैसेंजर ट्रेन का उद्घटान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। सुपौल स्टेशन पर उद्घटान स्पेशल ट्रेन के पंहुचते ही पूरे क्षेत्र में रेल परिचालन का सपना पूरा होने की उम्मीद बढ़ गयी है। कोशी महासेतु पुल की लंबाई करीब 1.88 किमी है जो ओपन वेब गर्डर पर 39 स्पेन के साथ अत्याधुनिक तकनीक के साथ इस पुल का निर्माण किया गया है।

86 साल बाद कोशी नदी होकर गुजरेगी ट्रेन, पहले तिलजुगा नदी पर बना था पुल

मूल रूप से सरायगढ़ और निर्मली रेलखंड पर 86 साल बाद ट्रेन चलेगी। 1887 में निर्मली के पास कोशी की सहायक नदी तिलजुगा पर पुल बनाया गया था जो सरायगढ़ और निर्मली को रेलमार्ग से जोड़ती थी। 1934 में आये प्रयालंकारी भूकंप के बाद तिलजुगा नदी पर बना पुल ध्वस्त हो गया था। वक्त के साथ कोशी नदी अपनी धारा बदलकर पश्चिम में शिफ्ट होती गयी और मूल स्थान से दूर आसनपुर कुपहा के पास 1.88 किमी लंबे ब्रिज का निर्माण किया गया। कोशी नदी पर बना ये पुल मिथिला के दो भागों को एक करेगी।

भविष्य में दिल्ली से पूर्वोत्तर की दूरी होगी कम, सहरसा से दरभंगा की दूरी होगी कम

206 किमी लंबे सहरसा, सुपौल, सरायगढ़, फारबिसगंज, सकरी निर्मली रेल परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वेकल्पिक मार्ग मिलेगा। सहरसा दरभंगा रेलखंड के सहरसा से आसनपुर कुपहा तक आमन परिवर्तन कार्य पूरा कर लिया गया है। आसनपुर कुपहा से आगे निर्मली तक पुल तैयार है फिर भी रेल निर्मली नहीं पहुंच सकी। वही दरभंगा से झांझरपुर तक से आगे तमुरिया तक आमन परिवर्तन कार्य पूरा कर लिया गया है। तमुरिया से आगे निर्मली तक ट्रैक बिछाने का काम किया जा रहा है। अगले दो से तीन महीनों में सहरसा से दरभंगा के बीच कोशी रेल महासेतु होकर नई रेल शुरू की जा सकेगी। इसके अलावे सहरसा फारबिसगंज रेलखंड के राघोपुर तक आमान परिवर्तन कार्य पूरा कर लिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2021 तक फारबिसगंज तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा और इसके साथ ही सुपौल अररिया गलगलिया नई रेल लाइन के पूर्ण होते ही दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यो के लिए फारबिसगंज और सुपौल के रास्ते दो दो वेकल्पिक मार्ग मिलेंगे।

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