चंपारण सत्याग्रह से जुड़े स्थल के बाबजूद भी नरकटियागंज भिखनाठोरी रेलखंड पर पिछले 5 साल से ट्रेन चलने का इंतजार,पहली बार मालगाड़ी के चलने से जगी उम्मीद

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8पश्चिम चंपारण स्थित 32 किमी लंबी नरकटियागंज भिखनाठोरी रेल परियोजना जिसके शुरू होने का इंतजार लोग पिछले 5 वर्षों से देख रहे है। 24 अप्रैल 2015 को नरकटियागंज भिखनाठोरी के बीच मीटर गेज लाइन को बंद कर बड़ी लाइन की ट्रेन शुरू आमन परिवर्तन कार्य को लेकर मेगा ब्लॉक लिया गया था लेकिन 5 वर्ष बीतने के बाद भी एक किमी रेल नही चल सकी। इस रेलखंड की डेड लाइन 2017 रखी गयी थी। यह रेल परियोजना भारतीय इतिहास और गांधी जी के चंपारण आंदोलन के लिहाज से अति महत्वपूर्ण परियोजना है। बहुत लोगों को नही मालूम होगा कि गाँधी जी ने सत्याग्रह की सुरूआत पश्चिमी चंपारण के भीतिरवा आश्रम से की थी वहा कुछ दिन रुके भी थे लेकिन सरकार इतिहास को पलटने की कोशिश कर रही गाँधी जी जुड़े सारे कार्यक्रम भीतिरवा आश्रम से 100 किमी दूर मोतिहारी में किये जाते है जबकि भीतिरवा आश्रम को जोड़ने वालि नरकटियागंज- भीखनाठोरी लाइन पर न ही राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार की नजर पड़ी।

डीआरएम के निरीक्षण के बाद ट्रेन के चलने की जगी आस

डीआरम अशोक माहेश्वरी ने 4 अप्रैल को इस रैलखण्ड का निरीक्षण किया था। डीआरएम के आगमन के बाद से ही इस रेलखंड के निर्माण की उम्मीद जगी है। बीते पांच वर्षों में पहली बार नरकटियागंज के पूर्वी केविन से 53 बोगियों से मई के आखिरी हफ्ते में महज एक किमी तक ब्लास्ट गिराया गया था। ब्लास्ट गिरने के बाद से अभी तक काम बंद है। पांच साल बाद पहली बार पकड़ीढाला तक ब्लास्ट लेकर मालगाड़ी चली थी। पहले फेज में अमोलवा तक स्टोन डस्ट गिराने का लक्ष्य रखा गया है। इस साल दिसंबर तक नरकटियागंज भिखनाठोरी के बीच रेल सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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