चीन के इस चाल से भारत और नेपाल के रिश्तों में पड़ी दरार, जाने नेपाल के स्कूलों ने चीनी भाषा का क्यो बढ़ा प्रचलन, पढ़े रिपोर्ट

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भारत और नेपाल की संस्कृति, सभ्यता लगभग एक समान है। कभी दोनो देशों के बीच टकराव की स्थिति नही आई। लेकिन हाल के दिनों में नेपाल ने जिस तरह से सीमा विवाद का मुद्दा उठाया इससे दोनों देशों को असहज कर दिया है। नेपाल के लोगों का भारत के प्रति रवैया हाल के दिनों में काफी बदला हुआ है। एक तरफ चीन जहां नेपाल में निवेश के साथ रेल, व्यापार एवं अपनी भाषा का प्रचार प्रसार कर रहा है वही नेपाल के लोग भी भारत से दूर और चीन के सुर में सुर मिला रहे है। नेपाल के कई स्कूलों में चीनी भाषा पढ़ाई जाती है जिसका फंडिंग खुद चीन कर रहा है। मोटी रकम की लालच में नेपाल के स्कूल नेपाल में चीनी भाषा के प्रचलन को बढ़ा रहे है। चीन नेपाल में कई तरह के निवेश कर रहा है और अपने बाजार को विकसित करने में लगा है। हाल ही में जिस तरह नेपाल के कम्युनिस्ट सरकार ने कई भारत विरोधी बातें की है इससे साफ जाहिर होता है कि चीन पर्दे के पीछे नेपाल को मोहरा बनाकर भारत पर निशाना बना रहा है। चीन पूरी दुनिया को अपने ऊपर लगे कोरोना संक्रमण के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए छोटे छोटे देशों को पैसे और निवेश की लालच देकर मोहरा बना रहे हैं। नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार अपने लोगों को ये विश्वास दिलाने में लगी है की चीन ही उसका असली हितैषी है। नेपाल चीन से की गई नई नई दोस्ती में ड्रैगन को खुश करने के लिए सुर में सुर मिला रहा है। एक तरफ जहां हांगकांग के लोग चीन का विरोध कर रहे है वही दूसरी तरफ नेपाल ने कहा कि हांगकांग चीन का हिस्सा है। नेपाल ने चीन द्वारा हांगकांग में लगाई जा रही नए सुरक्षा कानून का समर्थन किया है। नेपाल में सोशल मीडिया के माध्यम से भारत विरोधी बातों का बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार किया जा रहा है। भारत के कई राज्यों और हिस्सो को नए नए नक्शों से साथ नेपाल की बताए जाने की कोशिश की जा रही है जिससे की दोनों देशों के लोगों के बीच कभी न खत्म होने वाली दीवार खड़ी की जा सके।

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