जैसी प्रजा वैसे नेता, आखिर क्यों हर 5 साल में झूठे वादों के बीच बंगाली बाजार रेल ओवरब्रिज बनता है चुनावी मुद्दा???

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Saharsa ROB

पिछले 20 सालों के अखबार के पन्नो को पलट कर देखा जाए तो हमेसा एक तारीख मिल जाएगी कि अगले 2 महीने में तो अगले 6 महीनों में सहरसा बंगाली बाजार रेल ओवरब्रिज का काम शुरू हो जाएगा। अब विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का हर नेता जनता के सामने प्रकट होकर आश्वाशन देता है की नही बस हम ही काम शुरू करवा सकते है दूसरे नेता में वह बात नही। पिछले 15 सालों में नीतीश कुमार की सरकार रही जिसमें से 9 साल केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही और अभी 6 साल से केंद्र में बीजेपी की सरकार है। लेकिन किसी भी कार्यकाल में ओवरब्रिज नही बन सका। बिहार के तीन तीन रेलमंत्री रहते हुए भी काम शुरू नहीं करा सके तो सांसद और विधायक का तो बस काम है कह देना। आखिर कुछ तो बोलना है नेताओं को और लोगों को सुनने की अच्छी आदत है। यह बताने की जरूरत नहीं रही की जिस तरह शहर का विस्तार हो रहा है सिर्फ बंगाली बाजार रेल ओवरब्रिज ही नहीं, गंगजला रेल ढाला पर भी ओवरब्रिज बनाने की जरूरत है। भले ही काम शुरू नहीं हो सका आज तक लेकिन चुनावों में इन सब नेताओं ने बंगाली बाजार के नाम पर चुनाव जरूर जीता होगा। एक तो सहरसा की जनता जिसके मुद्दे हर दिन के साथ बदल जाते है। सहरसा के लोगों की समस्या है भूल जाने की, लोग जरूरी मुद्दों को भूलकर नए मुद्दों पर बोलेंगे जैसे कि सहरसा को तो उन्होंने जापान बना दिया हो। नेताओ के साथ अब लोगों को लाइम लाइट की आदत पड़ गयी है। इस छोटे से शहर में हर कोई नेता है और कोई किसी नेता से कम नही है। बंगाली बाजार का मुद्दा केंद्र सरकार तो कभी राज्य सरकार, कभी पुराना नक्शा तो कभी नया नक्शा तक सिमट कर रह गया है लेकिन नेताओं का काम है कि कहना कि अब नक्शा फाइनल है इस बार काम शुरू होगा। जिस तरह 23 साल से नेताओं को झूठे वादे करने की आदत पड़ गुई है और लोगों को सुनने कि आखिर लोग जाए तो जाए कहा। वैसे ही शहर का एक तबका है जो खुद को बुद्धजीवी समझते है और अपनी राय देने में आगे रहेंगे की ऐसा होगा, वैसा होगा शहर लेकिन सब को पता है और देखते ही देखते एक छोटी सी समस्या को विकराल बना दिया है।

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