कोटा डायरी: 2007 टी-20 विश्व कप के मैचों के दौरान कोटा की सड़को पर मैच देखने के लिये उमड़ पड़ता था छात्रों का हुजूम!!

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महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट ने भारतीय टीम की कायापलट कर दी। 2007 के पहले टी-20 विश्व कप के फाइनल में उस ऐतिहासिक जीत ने लोगों को घरों से निकल सड़को पर जश्न मनाने को मजबूर कर दिया। हम बात कर रहे है कोटा की जहां देश भर के छात्र आईआईटी और डॉक्टर बनने के सपने के साथ कोटा नगरी जाते है ऐसे में ही 2007 में जब पटना समेत बिहार के कई छात्र कोटा आईआईटी की तैयारी करने गए थे। ठीक उसी साल टी-20 का विश्व कप शुरू हुआ पटना के नीतीश कुमार जो उस समय आईआईटी की तैयारी करने कोटा गए थे। उन्होंने बताया कि वहां छात्रों के पास तो टीवी होता नहीं था और न ही स्मार्ट फोन का जमाना था। कोचिंग से लौटने पर चाय की दुकान पर मैच देखने के लिए छात्रों की भीड़ जमा हो जाती थी और एक एक शॉट पर छात्रों का शोर दूर तक सुनाई देता था। किसी भी चाय दुकान पर जहां टीवी पर ये मैच चल रहा होता अमूमन हर दुकान के बाहर 50 से 60 की संख्या में छात्र क्रिकेट का लुफ्त उठाते। युवराज सिंह के छह छक्कों के बाद से तो सड़को का नजारा ही बदल गया। उसके बाद से सड़कों पर मैच के दौरान सन्नाटा छा जाता और जिस दुकान पर टीवी पर मैच होता उस जगह इतनी भीड़ होती कि सड़क जाम हो जाते और अमूमन कई बार पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाना पड़ता। पुलिस के जाने के बाद फिर से फिर इक्कठी हो जाती। धोनी के लंबे बाल उस समय इतने पॉपुलर थे कि कई छात्र धोनी कट रखने लगे थे। फाइनल के दिन तो मानो देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा हो। छात्र हाथ मे तिरंगा लिए हजारों की संख्या में सड़कों पर मैच का आनंद ले रहे थे। जोगिंदर शर्मा की गेंद पर जीत के बाद सड़को पर कोटा शहर उतर आया और देश भक्ति के नारों के साथ सड़को पर हजारों की संख्या में छात्रों की भीड़ एक विशाल जुलूस में बदल गयी।

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