सहरसा में दूसरी वॉशिंग पिट सहित इन सुविधाओं का अब भी इंतजार,क्षेत्र की पहचान है रेलवे स्टेशन

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Saharsa railway station
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Saharsa railway station: सहरसा जंक्शन पर दूसरी वाशिंग पिट, रैंप, स्वचालित सीढ़ी, एसी वेटिंग हॉल का अब भी इंतजार

Saharsa railway station: सहरसा रेलवे स्टेशन पूर्व मध्य रेलवे स्थित समस्तीपुर मंडल के बेहतरीन स्टेशन में से एक है। आमदनी के हिसाब से सहरसा जंक्शन दरभंगा के बाद दूसरे नंबर पर है। सहरसा रेलवे स्टेशन पर अभी सुविधाओं की कमी है, जिसकी मांग कई बार उठाई गई है।

सहरसा जंक्शन पर इन सुविधाओं का अब भी इंतजार

सहरसा स्टेशन के पूर्वी रेल कॉलोनी में सर्कुलेटिंग एरिया का निर्माण धीमी गति से चल रहा है, जिसे पूरा करने की जरूरत है, जिससे गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

सहरसा से कई लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन किया जाता है, दूसरे जिलों के कई यात्री स्टेशन से ट्रेन पकड़ते है, एसी वेटिंग रूम का निर्माण आज तक नहीं हो सका, 2017 में तत्कालीन डीआरएम ने इसकी घोषणा की थी।

सहरसा स्टेशन पर लगेज की जांच हेतु, प्लेटफॉर्म पर प्रवेश करने के दौरान स्कैनिंग मशीन लगाए जाने की जरूरत है।

सिमरी बख्तियारपुर से आने वाली ट्रेनों को आउटर पर इंतजार करना पड़ता है, छोटी लाइन के समय बने लोको शेड की जगह होल्डिंग लाइन का निर्माण होना था जिससे ट्रेनों को रखा जा सके, जिसका निर्माण मंजूरी के बाद अब तक शुरू नहीं हो सका।

सहरसा मधेपुरा को गंगजला होते हुए 2 किमी तक पटरी बिछाकर जोड़ने की जरूरत है, जिससे इंजन बदलने की समस्या से छुटकारा मिल सके और बंगाली बाजार में लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।

सहरसा में दूसरे वाशिंग पिट की मंजूरी मिल चुकी है, इसका निर्माण जल्द से जल्द शुरू करने की जरूरत है। दूसरे वाशिंग पिट के निर्माण के पूरा होने के बाद ही सहरसा से दिल्ली के अलावा हावड़ा, टाटा और दक्षिण भारत की ट्रेन मिलने की उम्मीद है।

सहरसा जंक्शन पर नवनिर्मित फुट ओवरब्रिज पर अब तक रैंप की सुविधा बहाल नहीं हो सकी है। रैंप के निर्माण होने से यात्रियों को सामना ले जाने और ले आने में राहत मिलेगी और यात्रियों को सीढ़ियों पर चढ़ने से छुटकारा मिलेगा।

सहरसा जंक्शन पर फुट ओवरब्रिज के साथ ही एस्कलेटर निर्माण की भी घोषणा डीआरएम ने कि थी जिसका निर्माण कराने की जरूरत है।

प्लेटफॉर्म संख्या 2 पर स्थित सभी रेल ऑफिस को सर्कुलेटिंग एरिया में बहुमंजली इमारत बनाकर एक ही भवन में शिफ्ट करने की योजना थी, जो ठंडे बस्ते में चली गई,इसे पूरा करने की जरूरत है।

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